मेरी कविताएँ

हाँ माँ तुम ही हो

यह छोटी सी कृति मेरी माँ के जन्मदिन पर लिख रहा हूँ…
बस अपने भावों को कुछ शब्द देने की कोशिश कर रहा हूँ…
बहुत मुश्किल है उस अन्दर छुपे अनंत भाव को शब्दों में बदलना…
बस एक कोशिश है…

सूरज की गर्मी और भव्यता हो तुम
आसमान की नीलाई और विशालता हो तुम

सागर की गहराई और अथाह हो तुम
ओंस की शीतलता और ठंडक हो तुम

धरती की सहनशीलता और सघनता हो तुम
पहाड़ की उंचाई और स्थिरता हो तुम

पंछी का कलरव और आज़ादी हो तुम
पेड़ों की छाँव और जीवन हो तुम

यह बता दो कौन नहीं हो तुम ?
यह बता दो किसमें नहीं हो तुम ?

जब हर ज़र्रे में हो तुम
जब हर बात हो तुम

तभी हमारी इबादत हो तुम
तभी हमारा सम्मान हो तुम

हाँ माँ,
तुम्हारे सामने ये मस्तक हैं नम..
तुम्हारे सामने ये मस्तक हैं नम..

आप मेरी माँ की कविताएँ यहाँ पढ़ सकते हैं |
जन्मदिन की शुभकामनाएं सबसे नवीनतम पोस्ट पर दें |
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4 thoughts on “हाँ माँ तुम ही हो

  1. सागर की गहराई और अथाह हो तुमओंस की शीतलता और ठंडक हो तुमधरती की सहनशीलता और सघनता हो तुमपहाड़ की उंचाई और स्थिरता हो तुमbahut sunder rachana maa ke liye,maa aisi hi hoti hai,unko janam din ki dheron badhai

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  2. कहते हैं कि-ठंढ़क माँ के नाम की गरमी को शरमाए।ममता ले आँचल से धूप भी छनकर आए।।सादर श्यामल सुमन09955373288मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।http://www.manoramsuman.blogspot.comshyamalsuman@gmail.com

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  3. Ye jo duniya hai-ye van hai kanton ka, tu phulwari hai – O maa, o maa…Birthday wishes to your Maa from my side also.Nice post Pratik…Keep rocking

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